abhiwrites

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वो यादें

ये सुबह ,ये हवा , ये चिड़ियों की आवाजें।

सब तो है खुशनुमा ।
सब बेहद सुकून दे रहे है।
मगर कभी कभी ये बेचैनी का झोंका अंतरमन को हिला क्यों देता है।
ये हवाएँ मुझे उस ओर ही क्यों ले जाना चाह रही है।
उसके शहर जाना भी चाहता हूं मगर उसकी नाराज़गी के साथ नही।
वो कुछ कहे ये चाहता हूँ मगर मुझसे न कहे।
वो सच मे भोली है या मुझे बहकाने का इरादा बनाया है।

यकायक आंखे खुली, सब मेरे धैर्य के बांध के यथावत स्थापित था ।
एक गर्म चाय का प्याला !
हल्की से मुस्कुराहट,
ये उथल पुथल सिर्फ़ क्षणिक मात्र है।
फिर याद आया आपके मन को कोई हरा नही सकता। 
यादें तो बिलकुल भी नहीं।

😊

#Abhiwrites❣

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6 Comments

खूबसूरत भाव और अभिव्यक्ति बेहतरीन

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Gunjan Kamal

05-Jan-2023 08:32 PM

शानदार प्रस्तुति 👌🙏🏻

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Raziya bano

05-Jan-2023 04:31 PM

Shaandar

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